Friday, January 19, 2007

एक कहानी होना चाहती है । -३

(जब काफ़ी देर तक नारद बाबा ने दिखाया ही नहीं, भाग २ का लिंक तो अपना लिखा जबरिया पढ़वाने का इससे सस्ता, सुन्दर और टिकाऊ तरीका और कुछ मिला नही, कोई भी पाठक आहत हुआ हो, तो खुदा राहत दे)

http://upasthit.blogspot.com/2007/01/blog-post_13.html

2 comments:

उडन तश्तरी said...

कोई बात नहीं-खुदा से राहत मिल गई. :)

अफ़लातून said...

प्रिय रवीन्द्र,
यह तरीका और सहूलियतमन्द होता यदि आप दिये गए पते(URL) को कड़ी (Link) के रूप में देते ।